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वरदान साबित हो रही पनघट योजना

Patrika news network Posted: 2017-07-12 16:59:16 IST Updated: 2017-07-12 16:59:16 IST
वरदान साबित हो रही पनघट योजना
  • बिजली व पेयजल संकट वाले गांवों में सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना बड़ी कारगर साबित हो रही है। सूरज की रोशनी बिजली का काम कर रही है तो टंकी भरते ही नलकूप की मोटर स्वत: ही बंद हो जाती है। न बिजली पर निर्भर पर रहना पड़ता और न ही पानी व्यर्थ बहता है।

नैनवां.

सूरज की रोशनी बिजली का काम कर रही है तो टंकी भरते ही नलकूप की मोटर स्वत: ही बंद हो जाती है। न बिजली पर निर्भर पर रहना पड़ता और न ही पानी व्यर्थ बहता है। बिजली व पेयजल संकट वाले गांवों में सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना बड़ी कारगर साबित हो रही है। 


योजना से एक हजार तक की आबादी वाले गांव को पेयजल उपलब्ध हो जाता है। जलदाय विभाग व सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्ट्रमेंटस लिमिटेड जयपुर द्वारा नैनवां उपखंड के बिजली व पेयजल संकट वाले सात गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना का स्ट्रक्चर लगाया है। 


पांच गांव सुवानिया, उगैन, गोवल्या, फलास्तूनी व रघुनाथगंज में पनघट योजना से पानी मिलना भी शुरू हो गया। पेयजल योजना के पास ही टंकी के नीचे ही दो नल स्थापित हैं, जो पानी भरने के काम आते है। सुवानिया गांव के लोगों ने बताया कि पहले पानी का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा था। दो से तीन किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा था। योजना शुरू होते ही पानी का संकट दूर हो गया। अब तो अब घर बैठे ही गंगा आ गई। 


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नौ लाख रुपए का खर्चा  

जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता महेश गुर्जर ने बताया कि सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना पर लगभग नौ लाख रुपए का खर्चा आता है। योजना को पांच साल तक संचालित व मरम्मत की राशि भी इसमें ही शामिल है। 

योजना में कोई तकनीकी खराबी आती है तो उसे राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्ट्रमेंटस लिमिटेड द्वारा ही ठीक करना है। गांवों में पेयजल योजना संचालित करने के लिए बिजली कनेक्शन कराना ही सबसे ज्यादा महंगा पड़ता है। नलकूप से विद्युत लाइन की दूरी ज्यादा होती है तो कई माह तक तो कनेक्शन ही नहीं हो पाता। इस योजना में बिजली कनेक्शन का झंझट ही नहीं रहता। 


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ऐसे स्थापित होता है स्ट्रक्चर 

जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता दिनेश गोचर ने बताया कि सौर ऊर्जा चलित पनघट योजना के लिए जलदाय विभाग ने एक नलकूप, लोहे का स्ट्रक्चर खड़ाकर पांच हजार लीटर क्षमता की टंकी रखवाई है। वही राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड इन्स्ट्रमेंटस लिमिटेड ने स्वचालित मोटर को चलाने के लिए सौर ऊर्जा चलित सिस्टम स्थापित किया है। सिस्टम में स्वचालित लेबल कंट्रोलर व लेबल इंडिगेटर स्थपित है। टंकी के भराव क्षमता के लेबल  पर आते ही नलकूप की मोटर स्वत: ही बंद हो जाती है। 


पनघट योजना पर बैटरी रहित  सौर ऊर्जा की प्लेट्स लगाई है, जो शाम को सूर्य की रोशनी बंद होते ही बंद और सुबह सूर्य की रोशनी के साथ स्वत: ही चालू हो जाती है। योजना से पांच गांवों में पानी मिलना शुरू हो गया है, जबकि केमला व देवपुरा में डीसी कंट्रोलर स्थापित होते ही यहां पर भी योजना से जलापूर्ति शुरू हो जाएगी।

rajasthanpatrika.com

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