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दाल के लिए अब नहीं ताकेंगे पड़ौसी का मुंह

Patrika news network Posted: 2017-03-19 12:29:34 IST Updated: 2017-03-19 12:43:16 IST
दाल के लिए अब नहीं ताकेंगे पड़ौसी का मुंह
  • बूंदी समेत देशभर में दलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए डेढ सौ सीड हब विकसित होंगे। इनमें सीड प्रोडक्शन का काम किया जाएगा।

सुरक्षा राजौरा. बूंदी.

प्रदेश के बूंदी समेत नौ जिलों में विकसित होंगे दलहन सीड हब


बूंदी समेत देशभर में दलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए डेढ सौ सीड हब विकसित होंगे। इनमें सीड प्रोडक्शन का काम किया जाएगा। बूंदी के कृषि विज्ञान केंद्र में इसके लिए काम शुरू हो गया।


जानकार सूत्रों ने बताया कि पहली बार किसानों के लिए समर्थन मूल्यों पर दलहन फसलों की बिक्री सुनिश्चित करवाने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था के तहत जहां भी दलहन फसलों का बाजार भाव समर्थन मूल्य से कम होगा, वहां सरकार की संस्थाएं किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करेंगी। इसके अतिरिक्त दालों का स्टाक भी किया जाएगा। 


लोगों को दाल के महंगे बाजार भाव से छुटकारा दिलाया जा सके। इसके लिए रेटप्रूफ गोदामों का निर्माण होगा। अभी देश में दालों को कमी की वजह से इन्हें आयात करना पड़ता है और अक्सर दालों की कीमतों में उछाल आता है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र नई किस्मों की दलहनी फसलों के बीज तैयार करेगा।योजना के पहले चरण में राजस्थान के छह जिलों में यह काम शुरू हुआ। 


नौ जिले शामिल

राजस्थान के 9 जिलों में यह सीड हब विकसित होंगे। जिनमें बूंदी, बीकानेर, बांसवाड़ा, अजमेर, अलवर, झालावाड़, कोटा, नागौर व जालोर जिले शामिल किए हैं।केन्द्र सरकार ने इसकी मंजूरी जारी कर दी। प्रत्येक हब को विकसित करने में करीब डेढ़ करोड़ की लागत आएगी।


केन्द्र पर तैयार होगा

दो भागों में यह बीज उत्पादन होगा। ब्रिडर सिड्स कृषि विज्ञान केन्द्र पर तैयार होगा। ब्रिडर टू फाउडेंशन यह किसानों के खेतों पर सहभागिता के आधार पर उत्पादन किया जाएगा। इसमें किसानों को बीज कृषि विज्ञान केन्द्र उपलब्ध करवाएगा।


किसानों को मिलेगा फायदा

किसानों को दो तरह का फायदा होगा। जिले में किसानों को दलहनी फसलों के उन्नत बीजों के लिए निजी कम्पनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जिले में उन्नत बीज आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इससे दालों का एरिया बढ़ेगा। उत्पादन और उत्पादकता के साथ दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। 

ऐसे होंगे सीड-हब

35 लाख रुपए का अत्याधुनिक रेटपू्रफ मॉर्डन सीड्स गोदाम बनेगा। जिसमें वेंटिलेशन का प्रोविजन होगा ताकि दलहन फसल खराब नहीं हो। इसका डिजाइन आईसीएआर इंडियन कॉन्सिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च द्वारा तैयार किया है। 


साथ ही उसी में 2 टन पर हावर केपेसिटी का पूर्ण ऑटोमेटिक ग्रेडिंग प्लांट होगा जिसमें एक समान दाना मिलेगा। कटा हुआ दाना अलग हो जाएगा। तीन वर्ष का यह प्रोजेक्ट है। इसमें बूंदी को ढाई हजार क्विंटल दलहन का उत्पादन करना होगा। मूंग, उड़द, अरहर व चना का प्रमुख उत्पादन किया जाएगा।

दालों का विदेशों से निर्यात नहीं करना पड़ेगा। बूंदी में सीड स्टोरेज का कार्य शुरू हो गया, जल्द ही किसानों के साथ लोगों को इसका फायदा मिलना शुरू हो जाएगा। जिले में दालों की उन्नत बीजों की कमी के चलते पहले किसानों को निजी कम्पनी पर निर्भर रहना पड़ता था।

डॉ. एन.एल. मीणा, कार्यक्रम समन्वयक कृषि विज्ञान केन्द्र, बूंदी

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