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लाइसेंस बिना, कैसे करें खून का बंटवारा

Patrika news network Posted: 2017-06-19 11:37:31 IST Updated: 2017-06-19 11:37:31 IST
लाइसेंस बिना, कैसे करें खून का बंटवारा
  • यहां आरबीएम राजकीय अस्पताल में खून के बंटवारे करने वाली लाखों रुपए की मशीनें महज एक लाइसेंस नहीं मिलने के चक्कर में शो-पीस बनकर रह गई हैं।

भरतपुर.

यहां आरबीएम राजकीय अस्पताल में खून के बंटवारे करने वाली लाखों रुपए की मशीनें महज एक लाइसेंस नहीं मिलने के चक्कर में शो-पीस बनकर रह गई हैं।


ड्रग कंट्रोलर से लाइसेंस मिलने के बाद इन मशीनों से काम शुरू हो सकेगा। ऐसे में सरकार लाखों रुपए खर्चकरके भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही है। महीनों से यह मशीनें अस्पताल में धूल फांक रही हैं।


आरबीएम अस्पताल में हाल ही निर्मित ब्लड कंपोनेंट यूनिट सेल की इमारत में यह मशीनें रखी हुईहैं। एनआरएचएम ने इस वर्ष 50 लाख रुपए की लागत से ब्लड कंपोनेंट यूनिट सेल के लिए इमारत का निर्माण कराया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग निदेशालय ने 70 से 80 लाख रुपए की मशीनें यहां भिजवाई थी। इमारत बनकर अस्पताल प्रशासन को मिल चुकी है।


कंपोनेंट नहीं कर पा रहे अलग


मरीज के खून से प्लेटलेट्स, प्लाजमा, रेड  ब्लड सेल (एनीमिया) आदि का पता लगाकर उसे किस कंपानेंट की जरूरत है। इसका मशीनों से काम अटका पड़ा है। यह मशीनें मिलने के बावजूद मरीज निजी प्रयोगशालाओं में लुटने और धक्के खाने को मजबूर हैं। ब्लड कम्पोनेंट यूनिट शुरू होने पर रक्त से प्लाजमा, प्लेटलेट्स, रेड ब्लड सेल (एनीमिया) को अलग-अलग किया जाएगा। इससे एक यूनिट ब्लड को जो कंपोनेंट चाहिए, उस जरूरत अनुसार तीन मरीजों को चढ़ाया जा सकेगा।


यह आई हैं मशीन


झुलसे मरीज को प्लाजमा का ब्लड, डेंगू पीडि़त को प्लेटलेट्स और एनीमिया के मरीज को रेड ब्लड सेल का ब्लड दिया जाता है। इसके लिए ब्लड सेल सेप्रेटर, प्लेटलेट्स के लिए इनक्रूवेटर, रेजीटेटर, डी-फ्रीज, फेरेसिस, लेमीनार एयर फ्लो, प्लाजमा एक्सप्रेसर, माइनस 80 व मानइस 40 डिग्री तापमान की मशीन सहित करीब तीस मशीनें आई हैं।


- ब्लड कम्पोनेंट यूनिट तैयार है और मशीनें भी आई हुई हैं। लेकिन लाइसेंस नहीं लिया जाएगा तब तक इसे सुचारू नहीं कर सकते। ड्रग कंट्रोल से आवेदन फार्म देने के लिए कहा है और फीस भी पूछी है। शीघ्र लाइसेंस का आवेदन कर फीस जमा करा देंगे। जिससे मरीजों को चिकित्सकीय सुविधाएं दी जा सकें।

डॉ. श्यामसुन्दर, पीएमओ, भरतपुर

rajasthanpatrika.com

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