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पूरे होश में बना रहे, सीएफसीडी की डीपीआर

Patrika news network Posted: 2017-06-18 11:38:32 IST Updated: 2017-06-18 11:38:32 IST
पूरे होश में बना रहे, सीएफसीडी की डीपीआर
  • शहर की सिटी फ्लड कन्ट्रोल डे्रन (सीएफसीडी) की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) विधिवत बनाने के लिए पहली बार उचित दिशा में कवायद शुरू की गई है।

भरतपुर.

शहर की सिटी फ्लड कन्ट्रोल डे्रन (सीएफसीडी) की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) विधिवत बनाने के लिए पहली बार उचित दिशा में कवायद शुरू की गई है।


नगर विकास न्यास ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर पैनल में शामिल फर्मों से इस काम की बोली लगाने के लिए कहा है। यदि सब कुछ सही चला तो जून के बाद इस काम को गति मिल सकेगी। सीएफसीडी के मुद्दे पर हजार बातें करने वाली यूआईटी इसके निर्माण के लिए कभी गंभीर प्रयास नहीं कर सकी। अब यह भी बताया जा रहा है कि कभी इसकी विधिवत तरीके से डीपीआर ही तैयार नहीं कराई गई।


न्यास सचिव रहे सुरेश नवल के कार्यकाल में डीपीआर अधूरी रह गई थी तो अमृत योजना शुरू होने के बाद नगर निगम ने इसकी डीपीआर बनवाने की कवायद शुरू की। लेकिन योजना की राशि सरकार द्वारा अस्वीकृत कर दिए जाने के बाद भुगतान संबंधी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। सीएफसीडी के आउट लाइन नुमा नक्शे ज्यादा काम के नहीं बताए जाते और न ही इसका खसरा सुपर इम्पोज हो सका।


ऐसे में न्यास के सामने इसकी डीपीआर बनवाने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा। सूत्रों के अनुसार 27 जून तक पैनल में शामिल फर्मे आवेदन करेंगी, जबकि 29 जून को उनके द्वारा दी गई पेशकश की निविदाओं को खोला जाएगा।


देरी से बढ़ रहे कब्जे


सीएफसीडी निर्माण में हो रही देरी का फायदा उठाकर लोग कहीं मिट्टी का भराव डाल रहे हैं तो कहीं अवैध निर्माण कर रहे हैं। अभी भी जो हिस्से सीएफसीडी के बच रहे हैं, लोग उनको खुर्दबुर्दकरने में लगे हैं। शनिवार को ही गोवद्र्धन गेट पर सीएफसीडी के एक नाले में एक जमीन पर फिर से मिट्टी डालने का काम शुरू कर दिया गया है। इसकी शिकायत पड़ौसियों ने अधिकारियों को भी की।


मानसून निकट, कार्रवाई शून्य


जानकार मानते हैं कि सीएफसीडी का निर्माण एक दीर्घकालीन प्रक्रिया है। ऐसे में शहर को जल प्लावन की स्थिति से बचाने के लिए सीएफसीडी की सफाई, उस पर अवैध कब्जों की रोकथाम, पुलियाओं की सफाई जैसे महत्वपूर्ण काम करने जरुरी हैं। लेकिन यूआईटी और निगम इन तात्कालिक किए जाने वाले कार्यों पर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। अब यदि तेज बारिश होती है तो शहर में जल प्लावन के जिम्मेदार संबंधित एजेंसियों के अफसर ही होंगे।


पत्रिका की मुहिम का असर


शहर की जीवनरेखा सीएफसीडी के वजूद को बचाने के लिए राजस्थान-पत्रिका द्वारा चलाए गए समाचार अभियान के बाद सरकार, जिला प्रशासन और यूआईटी ने इसके निर्माण की कवायद शुरू की। इसकी का नतीजा है कि अब यूआईटी टेंडर कर इसके निर्माण का काम आगे बढ़ा रही है।

rajasthanpatrika.com

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