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वैज्ञानिकों को आश्चर्य, इतना पानी कहां से आ रहा

Patrika news network Posted: 2017-06-17 13:14:08 IST Updated: 2017-06-17 13:14:08 IST
वैज्ञानिकों को आश्चर्य, इतना पानी कहां से आ रहा
  • रेगिस्तान में सरस्वती नदी की खोज को पहुंचा अध्ययन दल, केन्द्र के निर्देश पर, वैज्ञानिकों को बायतु विधायक ने करवाया भ्रमण, शिव और बायतु क्षेत्र के कुओं में आ रहा पानी देखकर हुए अचंभित

बाड़मेर.

थार का रेगिस्तान जहां कभी लोग बूंद-बंूद पानी को तरसते थे, वहां पिछले सालों में खूब पानी निकल रहा है। 

सोलह अरब के जीरे की पैदावार और अरबों की फसलें लहलहा रही है। सैकड़ों कुओं से सिंचाई होने लगी है और ढाई से तीन सौ फीट पर मीठा पानी मिल रहा है।

 आखिर यह पानी आ कहां से रहा है? रिचार्ज का कोई सिस्टम या फिर पुरानी कोई नदी। अनुमान एक ही है निकलता है सरस्वती नदी। 

पाकिस्तान से लेकर थार के रेगिस्तान को पार करते हुए श्रीगगानगर और हनुमानगढ़ तक सरस्वती नदी के होने के प्रमाण भी मिले हुए हंै। 

बस इसी तलाश को अब रेगिस्तान में नए सिरे से प्रारंभ किया गया है। शुक्रवार को रेगिस्तान में सरस्वती नदी के प्रमाण तलाशने को केन्द्र सरकार के निर्देश पर एक अध्ययन दल पहुंचा।

बायतु विधायक कैलाश चौधरी ने बीते दिनों दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर सरस्वती नदी की खोज का मामला उठाया। 

शुक्रवार को केन्द्रीय भूजल बोर्ड राज्य एकीकृत के वैज्ञानिक ओपी पूनिया व रामकिशन चौधरी यहां पहुंचे। 

दोनों ने ही बाड़मेर के मौखाब, भिंयाड़, कानासर, काश्मीर, राजबेरा, ऊण्डू, भीमड़ा, झाक, रतेऊ, सिंघाडि़या, चौखला, बाटाडू सहित बायतु व शिव विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में पहुंचकर रेगिस्तान में जलस्त्रोत की जानकारी ली।

कुओं में पानी कहां से आ रहा

यहां पर सैकड़ों की संख्या मंे कुएं है। इन कुओं से द्विफसली इलाका हो गया है। पहले यह स्थितियां नहीं थी, पुराने जमाने में कुएं तो थे लेकिन केवल पेयजल लायक। 

करीब डेढ़ दशक से इन कुओं से इतना पानी आ रहा है कि यह इलाका अब आर्थिक उन्नति कर गया है। वैज्ञानिक ओ पी पूनिया का कहना है कि यह अध्यययन का विषय है।

 इतना पानी कहां से आया? रिचार्ज कैसे हो रहा है? इसके रिचार्ज का स्त्रोत क्या है।

ग्रामीणों ने बताया इतिहास

ग्रामीणों ने भी टीम से  चर्चा करते हुए उन्हें गांव में पानी की उपलब्धता के इतिहास की जानकारी दी। 

भिंयाड़ के धर्माराम का कहना था कि यहां पुराने जमाने के कुएं भी है और ट्यूबवेल भी। लेकिन जिस तरह से पानी अब उपलब्ध है, वैसा नहीं था। अब तो अथाह पानी मिल रहा है। राजेबरा और ऊण्डू में भी ग्रामीणों ने एेसी बात बताई।

खोदे जाएंगे 122 कुएं

केन्द्र सरकार ने सरस्वती नदी के प्रमाण वाले पांच जिलों में अब संभावित बहाव क्षेत्र में कुएं खुदवाने का निर्णय किया है।

 इसमें बाड़मेर व जैसलमेर में 122 कुएं खोदे जाएंगे। इन कुओं से पता किया जाएगा कि कितनी गहराई में पानी मिल रहा है।

 कहां से आ रहा है और इसका स्टोरेज कहां है। यह सरस्वती नदी की खोज का पहला चरण होगा।

ग्रामीणों ने डार्कजोन पर सवाल उठाया

 ग्रामीणों ने कहा कि शिव व बायतू क्षेत्र संपूर्ण को डार्क जोन में लिया है।लेकिन एेसा नहीं है। यहां कई ग्राम पंचातयों में पानी की उपलब्धता लंबे समय से है। जब पानी इतनी मात्रा में आ रहा है तो फिर डार्कजोन कैसे हुआ?

सेम्पल लिए पानी के

यहां पहुंचे केन्द्रीय अध्ययन दल ने यहां कुंए शुरू करवाकर उनमें आ रहे पानी के सेम्पल लिए। पानी को चखा और इसके बारे में ग्रामीणों से चर्चा की। यह पानी कब से आ रहा है और इसका उपयोग क्या हो रहा है इसे लेकर बात की।

रिपोर्ट तैयार की जाएगी

सरस्वती नदी के प्रमाण को लेकर दौरा किया। क्षेत्र को देखा और ग्रामीणों से बात की है। यह अध्ययन का विषय है। 

पाकिस्तान के बाद सुन्दरा, गडरारोड, जैसलमेर के घोटारू के क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है लेकिन बाड़मेर जिले के इस इलाके में भी पानी मौजूद है 

तो जरूर कोई न कोई स्त्रोत तो है ही। इसको लेकर अध्ययन किया जाएगा। रिपोर्ट बनाकर केन्द्रीय मंत्रालय को भेजी जाएगी।- ओ पी पूनिया वैज्ञानिक

पूरी कोशिश होगी

सरस्वती नदी के प्रमाण तलाशने का पूरा प्रयत्न है। इसके लिए केन्द्र सरकार से मदद ली जा रही है।

 आज अध्ययन दल आया है। आगे भी यह कार्यवाही जारी रहे इसके लिए प्रयत्न करेंगे। क्षेत्र के विकास के लिए यह बहुत ही जरूरी है।

 इससे पेयजल की समस्या का बड़ा समाधान निकलने की उम्मीद है। कृषि की संभावनाएं बढ़ेगी।- कैलाश चौधरी, विधायक बायतू

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