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अपयश से मुक्ति दिलाती है योगिनी एकादशी, इस विधि से करें व्रत और पूजन

Patrika news network Posted: 2017-06-20 08:00:54 IST Updated: 2017-06-20 08:27:44 IST
अपयश से मुक्ति दिलाती है योगिनी एकादशी, इस विधि से करें व्रत और पूजन
  • शास्त्रों के अनुसार 'योगिनी एकादशी' संसार के सभी प्राणियों को सभी प्रकार के अपयश और चर्म रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन सफल बनाने में सहायक होती है ।

जयपुर

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु के निमित्त योगिनी एकादशी करने का विधान है, जो इस वर्ष 20 जून को है। परमेश्वर श्रीविष्णु ने मानव कल्याण के लिए अपने शरीर से पुरुषोत्तम मास की एकादशियों को मिलाकर कुल 26 एकादशियों को प्रकट किया। 


कृष्ण और शुक्ल पक्ष में पडऩे वाली इन एकादशियों के नाम और उनके गुणों के अनुसार ही उनका नामकरण भी किया। सभी एकादशियों में नारायण समतुल्य फल देने का सामथ्र्य है। ये सभी अपने भक्तों की कामनाओं की पूर्ति कराकर उन्हें विष्णु लोक पहुंचाती हैं। इनमें 'योगिनी एकादशी' तो प्राणियों को उनके सभी प्रकार के अपयश और चर्म रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन सफल बनाने में सहायक होती है। 


'योगिनी एकादशी पूजा एवं फल' इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विधान है। साधक को इस दिन व्रती रहकर भगवान विष्णु की मूर्ति को 'नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का उच्चारण करते हुए स्नान आदि कराकर वस्त्र, चन्दन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप नैवेध, ताम्बूल आदि समर्पित करके आरती उतारनी चाहिए। पदम् पुराण के अनुसार योगिनी एकादशी समस्त पातकों का नाश करने वाली संसार सागर में डूबे हुए प्राणियों के लिए सनातन नौका के सामान है।

rajasthanpatrika.com

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