Video: ये हैं नवसंवत्सर के श्रेष्ठ मुहूर्त, इनमें करें शुभ कार्यों का श्रीगणेश

Patrika news network Posted: 2017-03-28 13:08:54 IST Updated: 2017-03-28 13:08:54 IST
  • अमावस्या प्रात: 8.27 तक, तदुपरान्त अन्तरात्रि अगले दिन सूर्योदय पूर्व प्रात: 5.45 तक चैत्र पक्ष की प्रतिपदा रहेगी। इसके बाद चैत्र शुक्ल पक्ष वि.सं. 2074 की द्वितीया प्रारम्भ हो जाएगी।

जयपुर

आज 28 मार्च 2017, मंगलवार है। शुभ वि. संवत् : 2073 (सूर्योदयकालीन), संवत्सर का नाम : सौम्य, शाके संवत् : 1939, हिजरी सन् : 1438, अयन : उत्तरायण, ऋतु : बसन्त, मास : चैत्र, पक्ष: कृष्ण।



तिथि 

अमावस्या प्रात: 8.27 तक, तदुपरान्त अन्तरात्रि अगले दिन सूर्योदय पूर्व प्रात: 5.45 तक चैत्र पक्ष की प्रतिपदा रहेगी। इसके बाद चैत्र शुक्ल पक्ष वि.सं. 2074 की द्वितीया प्रारम्भ हो जाएगी। इस प्रकार आज प्रतिपदा तिथि का क्षय होगा। 



शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को देवीकार्य या नवरात्रि में शुभ माना गया है। इसलिए बसन्त नवरात्रा आज से शुरू हो रहे हैं। नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद नक्षत्र दोपहर बाद 1.41 तक, तदन्तर रेवती नक्षत्र है। 



यदि समय व तिथ्यादि ग्राह्य हो तो उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में विवाहादि सभी मांगलिक कार्यादि शुभ कहे गए हैं। रेवती गण्डान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अत: रेवती नक्षत्र में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण की दृष्टि से 27 दिन बाद रेवती नक्षत्र में नक्षत्र शांति करा लेना हितकर है। 



योग

ब्रह्म नामक नैसर्गिक शुभ योग सायं 6.13 तक, तदुपरान्त ऐन्द्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग है। 



विशिष्ट योग

सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से दोपहर बाद 1.41 तक है। सर्वार्थसिद्धि नामक योग में प्रारम्भ किए गए कार्य प्राय: सिद्ध व सफल होते हैं। करण: नाग नामकरण प्रात: 8.27 तक, तदुपरान्त किंस्तुघ्न आदि स्थिर संज्ञक करण हैं।



शुभ मुहूर्त

उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज किसी शुभ व मंगल कृत्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं है। 



बसन्त नवरात्रा पर घट्स्थापना मुहूर्त

इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हुआ है। अर्थात् प्रतिपदा 28 मार्च 2017 मंगलवार को सूर्योदय बाद प्रारंभ होकर आज अंतरात्रि अगले दिन सूर्योदय पूर्व ही समाप्त हो रही है। 



इस प्रकार मंगलवार व बुधवार दोनों ही दिन प्रतिपदा उदय व्यापिनी नहीं बनी है। अत: शास्त्र निर्देशानुसार बसन्त नवरात्रा चैत्र कृष्ण अमावस्या (वि.सं. 2073) 28 मार्च 17 मंगलवार प्रात: 8.27 के बाद कर सकते हैं। 



शास्त्रों में देवी का आवाह्न व घट्स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय प्रात:काल में ही करना श्रेष्ठ बताया गया है, प्रात:काल के बाद घट्स्थापना का श्रेष्ठ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.07 से दोपहर 12.56 तक है। इसके अतिरिक्त श्रेष्ठ चौघड़ियों की दृष्टि से प्रात: 9.29 से दोपहर बाद 2.04 तक भी क्रमश: चर, लाभ व अमृत के चौघडिय़ों में भी घट्स्थापना की जा सकती है।



श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज प्रात: 9.29 से दोपहर बाद 2.04 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा अपराह्न 3.35 से सायं 5.06 तक शुभ के श्रेष्ठ चौघड़िए हैं एवं दोपहर 12.07 से दोपहर 12.56 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।



व्रतोत्सव

आज देवकार्य अमावस्या, चान्द्र संवत्सर 2073 विक्रमी पूर्ण, चांद्र संवत्सर 2074 प्रारंभ, बसन्त नवरात्रा प्रारंभ, घट्स्थापना प्रात: 8.27 के बाद, चैत्र शुक्लादि, गुडी पड़वा, श्री गौतम जयंती तथा कल्पादि है। 



दिशाशूल

उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल है। पर आज मीन राशि के चंद्रमा का वास उत्तर दिशा की यात्रा में सम्मुख होगा। याद रखें यात्रा में सम्मुख चंद्रमा धनलाभ कराने वाला माना गया है। 



चंद्रमा

चंद्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि मीन राशि में रहेगा। राहुकाल: आज अपराह्न 3.00 बजे से सायं 4.30 तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।



आज जन्म लेने वाले बच्चे 

आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (ञ,दे,दो,चा,ची) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इनकी जन्म राशि मीन है। दोपहर बाद 1.41 से पूर्व जन्मे जातकों का जन्म लोहापाद से, इसके बाद जन्मे जातकों का जन्म स्वर्णपाद से है। इनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए शांति कराकर कुछ दान-पुण्य करना चाहिए।




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