जब राजस्थान आए गुरु गोबिंद सिंह, इस राजा ने देश-धर्म की रक्षा के लिए भेंट की थी तलवार

Patrika news network Posted: 2017-04-13 10:25:55 IST Updated: 2017-04-13 10:29:17 IST
जब राजस्थान आए गुरु गोबिंद सिंह, इस राजा ने देश-धर्म की रक्षा के लिए भेंट की थी तलवार
  • इस गुरुद्वारे में गुरु गोविंद सिंह की दसवीं वाणी का हस्तलिखित दुर्लभ ग्रंथ होने से इसका देश में विशेष महत्व है। गुरुद्वारे को सिख जड़ियों की बगीची भी कहते हैं।

निशि जैन

जयपुर. चौड़ा रास्ता स्थित गुरुनानक देव संत्सग सभा जयपुर का सबसे पुराना गुरुद्वारा है। इसका इतिहास काफी पुराना है। तत्कालीन ढूंढ़ाड़ राज्य में मिर्जा राजा मानसिंह प्रथम पांच सिख जड़िया परिवारों को आमेर लाए थे। 



मुगल सेनापति मानसिंह प्रथम काबुल और कंधार जीतने के बाद लाहौर के गवर्नर रहे थे। वहां पर वे सूर्यवंशी जड़िया  कारीगरों के कुंदन की जड़ाई व मीनाकारी के काम से बहुत प्रभावित हुए और लाहौर से सरदार गोमा सिंह, धन्ना सिंह, गोपाल सिंह, हजारी सिंह को जयपुर ले आए। उन्हें जयगढ़ किले में ठहराने के बाद आमेर में रंगजी मंदिर के पास रहने के लिए हवेली दी। 


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इस खानदान में पद्मश्री सरदार कुदरत सिंह ने कुंदन की मीनाकारी कला को विश्व में विख्यात बनाया। उनके पुत्र व जड़ाई कारीगर इन्दर सिंह कुदरत के मुताबिक मानसिंह प्रथम के समय में सिख धर्म के दसवें गुरु गोविंन्द सिंह धार्मिक यात्रा के दौरान आमेर आए थे। 



आमेर नरेश मानसिंह ने गुरु गोविंद सिंह को सिख कारीगरों की बनाई सोने में हीरे जड़ी तलवार भेंट की। आमेर के तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर को नई राजधानी बनाया तो वे इस सिख खानदान को आमेर से जयपुर लाए। बेमिसाल मीनाकारी कला से प्रभावित होकर जयसिंह ने इन कारीगरों के लिए चौड़ा रास्ता में एक रास्ते का नाम 


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खास है ये गुरुद्वारा

इस गुरुद्वारे में गुरु गोविंद सिंह की दसवीं वाणी का हस्तलिखित दुर्लभ ग्रंथ होने से इसका देश में विशेष महत्व है। गुरुद्वारे को सिख जड़ियों की बगीची भी कहते हैं। 



लोग कहते हैं, सिटी पैलेस में शाही रसोबड़े में इस गुरुद्वारे की बगीची के कुएं के पानी की कांवड़ जाती थी। इस बगीची में गुरुद्वारे के साथ व गणेश जी के भी मंदिर बने हैं।


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