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शनिदेव की दयादृष्टि किसे देगी शुभ फल, जानिए आज का पंचांग

Patrika news network Posted: 2017-03-11 10:30:21 IST Updated: 2017-03-11 10:30:36 IST
शनिदेव की दयादृष्टि किसे देगी शुभ फल, जानिए आज का पंचांग
  • धृति नामक शुभ योग अंतरात्रि 3.55 तक, तदन्तर शूल नामक नैसर्गिक अशुभ योग हैं। शूल योग की प्रथम पांच घटी शुभ कार्यों में त्याज्य हैं।

जयपुर

आज 11 मार्च 2017, शनिवार है। शुभ विक्रम संवत् : 2073, संवत्सर का नाम : सौम्य, शाके संवत् : 1938, हिजरी सन् : 1438, अयन : उत्तरायण, ऋतु : बसन्त, मास : फाल्गुन, पक्ष - शुक्ल है।



तिथि 

चतुर्दशी रिक्ता संज्ञक तिथि रात्रि 8.24 तक, तदन्तर पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित है। पर पूर्णिमा तिथि में विवाहादि समस्त मांगलिक कार्य, पौष्टिक, वास्तु व अलंकारादिक कार्य शुभ रहते हैं।  



नक्षत्र

मघा उग्र व अधोमुख संज्ञक नक्षत्र सायं 5.07 तक, तदुपरान्त पूर्वाफाल्गुनी उग्र व अधोमुख संज्ञक नक्षत्र है। जिनमें उग्र व अग्निविषादिक असद् कार्य, शत्रुर्मदन व अन्य साहसिक कार्यों सहित मघा में विवाहादि कार्य भी शुभ रहते हैं तथा पूर्वाफाल्गुनी में कूपादि खनन, विद्या व जनेऊ आदि के कार्य शुभ रहते हैं। 



योग

धृति नामक शुभ योग अंतरात्रि 3.55 तक, तदन्तर शूल नामक नैसर्गिक अशुभ योग हैं। शूल योग की प्रथम पांच घटी शुभ कार्यों में त्याज्य हैं। 



विशिष्ट योग

दोष समूह नाशक रवियोग नामक शुभ व शक्तिशाली योग सूर्योदय से सायं 5.07 तक है। 



करण

गर नामकरण प्रात: 8.34 तक, तदन्तर रात्रि 8.24 तक वणिज नामकरण है। इसके बाद भद्रा प्रारम्भ हो जाएगी।



शुभ मुहूर्त 

उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज किसी शुभ व मांगलिक कार्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं हैं। 




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