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ये हैं आज के श्रेष्ठ नक्षत्र, इनमें प्रारंभ करेंगे शुभ कार्य, मां दुर्गा देंगी सफलता

Patrika news network Posted: 2017-03-30 10:41:45 IST Updated: 2017-03-30 10:41:45 IST
ये हैं आज के श्रेष्ठ नक्षत्र, इनमें प्रारंभ करेंगे शुभ कार्य, मां दुर्गा देंगी सफलता
  • अश्विनी नक्षत्र प्रात: 9.24 तक, तदन्तर भरणी नक्षत्र है। अश्विनी नक्षत्र में यथा आवश्यक यात्रा, औषध, अलंकार, विद्या, चित्रकारी, कलादि व विवाहांग के समस्त कार्य करने योग्य हैं।

जयपुर

30 मार्च 2017 को गुरुवार है। आज शुभ विक्रम संवत् : 2074, संवत्सर का नाम : साधारण, शाके संवत् : 1939, हिजरी सन् : 1438, अयन : उत्तरायण, ऋतु : बसन्त, मास : चैत्र, पक्ष : शुक्ल है।



तिथि 

तृतीया जया संज्ञक तिथि रात्रि 11.43 तक, तदुपरान्त चतुर्थी रिक्ता संज्ञक तिथि है। तृतीया तिथि में संगीत, वाद्य, कला कार्य- शिक्षा, अन्नप्राशन, उपनयन, वास्तु, गृहप्रवेश व अन्य द्वितीया तिथि में कथित कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। चतुर्थी तिथि में शत्रुमर्दन, बन्धन, शस्त्र व अग्निविषादिक असद् कार्य सिद्ध होते हैं। 



नक्षत्र

अश्विनी नक्षत्र प्रात: 9.24 तक, तदन्तर भरणी नक्षत्र है। अश्विनी नक्षत्र में यथा आवश्यक यात्रा, औषध, अलंकार, विद्या, चित्रकारी, कलादि व विवाहांग के समस्त कार्य करने योग्य हैं। भरणी नक्षत्र में सभी साहसिक कार्य, कुआ, कृषि तथा अग्नि सम्बंधी कार्य प्रशस्त हैं। 



योग

वैधृति नामक अत्यंत दुद्र्धर्ष व उपद्रवकारी योग पूर्वाह्न 11.07 तक, तदन्तर विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग हैं। वैधृति नामक योग में समस्त शुभ व मांगलिक कार्य सर्वथा वर्जित है। 



विशिष्ट योग

सर्वार्थसिद्धि नामक शुभ योग सूर्योदय से प्रात: 9.24 तक तथा रवियोग नामक शक्तिशाली शुभ योग प्रात: 9.24 से सम्पूर्ण दिवारात्रि है। करण: तैतिल नामकरण दोपहर बाद 1.38 तक, तदुपरान्त गरादि करण रहेंगे।



शुभ मुहूर्त 

उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज अश्विनी नक्षत्र में वैधृति दोषयुक्त अति आवश्यकता में उपनयन का अशुद्ध मुहूर्त है। अन्य किसी शुभ व मंगल कृत्यादि के शुभ व शुद्ध मुहूर्त नहीं है। 



व्रतोत्सव

आज तृतीय नवरात्रा, गणगौर पूजन, मनोरथ तृतीया व्रत, गौरी तृतीया, मत्स्य जयंती, मेला गणगौर (जयपुर में), मेवाड़ उत्सव प्रा. उदयपुर (राज.), मन्वादि, राज. स्थापना दिवस, आंदोलन तृतीया (बिहार में), उर्स मेला अजमेर, मु. मास रज्जब प्रारंभ, शुक्र का बाल्यत्व समाप्त रात्रि 12.45 से तथा वैधृति पुण्यं है। 



दिशाशूल

दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चंद्र स्थिति के अनुसार पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। 



चंद्रमा

चंद्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि मेष राशि में है। 



राहुकाल

दोपहर बाद 1.30 से अपराह्न 3.00 तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।

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