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वह शख्स प्रार्थना में भगवान से मांगता था ऐसी चीज जो आज तक किसी ने नहीं मांगी!

Patrika news network Posted: 2017-03-19 16:21:57 IST Updated: 2017-03-19 16:24:59 IST
वह शख्स प्रार्थना में भगवान से मांगता था ऐसी चीज जो आज तक किसी ने नहीं मांगी!
  • इस जिंदगी के विरोधाभास को जो समझ लेगा, उसने जीवन का सारा राज समझ लिया। दुख चुनौती है, विकास का अवसर है। यह अनिवार्य है। इसके बिना तुम जागोगे नहीं। कौन जगाएगा तुम्हें?

एक सूफी फकीर था, शेख फरीद। उसकी प्रार्थना में एक बात हमेशा होती थी दुख। उसके शिष्य उससे पूछने लगे कि यह बात हमारी समझ में नहीं आती, हम भी प्रार्थना करते हैं, औरों को भी हमने प्रार्थना करते देखा है। लेकिन यह बात हमें कभी समझ में नहीं आती, आप रोज-रोज यह क्या कहते हो कि हे प्रभु, थोड़ा दुख मुझे तू रोज देते रहना। यह भी कोई प्रार्थना है? 



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लोग प्रार्थना करते हैं, सुख दो और आप प्रार्थना करते हो, हे प्रभु, थोड़ा दुख रोज देते रहना। फरीद ने कहा कि सुख में तो मैं सो जाता हूं और दुख मुझे जगाता है। 



सुख में तो मैं अक्सर परमात्मा को भूल जाता हूं और दुख में मुझे उसकी याद आती है। दुख मुझे उसके करीब लाता है। इसलिए मैं प्रार्थना करता हूं, हे प्रभु, इतना कृपालु मत हो जाना कि सुख ही सुख दे दे। मुझे अभी अपने पर भरोसा नहीं है। 



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अगर तू केवल सुख देगा  तो मैं सो जाऊंगा। तू अलार्म बजाता रहना, थोड़ा-थोड़ा दुख देते रहना, ताकि याद उठती रहे। मैं तुझे भूल न पाऊं, तेरा विस्मरण न हो जाए। सब देखने के ढंग पर सब निर्भर करता है। जिसने खोया नहीं, उसे पाने का मजा नहीं मिलता। 



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इस जिंदगी के विरोधाभास को जो समझ लेगा, उसने जीवन का सारा राज समझ लिया। दुख चुनौती है, विकास का अवसर है। यह अनिवार्य है। इसके बिना तुम जागोगे नहीं। कौन जगाएगा तुम्हें? हालत तो यह है कि दुख भी नहीं जगा पा रहा है। तुमने दुख को भी अपने भीतर धीरे-धीरे राजी कर लिया है।




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