उस साधु के पास थी ऐसी सिद्धि, कदम रखता तो पानी पर भी चल सकता था!

Patrika news network Posted: 2017-01-15 15:52:13 IST Updated: 2017-01-15 16:07:01 IST
उस साधु के पास थी ऐसी सिद्धि, कदम रखता तो पानी पर भी चल सकता था!
  • महात्माजी खड़े हुए और पानी की सतह पर चलते हुए लंबा चक्कर लगाकर वापस स्वामीजी के पास आ खड़े हुए। स्वामीजी ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा- महात्माजी, यह सिद्धि आपने कहां और कैसे पाई?

स्वामी विवेकानंद एक बार कहीं जा रहे थे। रास्ते में नदी मिली तो वे वहीं रुक गए क्योंकि नदी पार कराने वाली नाव दूसरी छोर पर थी। तभी वहां एक चमत्कारी महात्मा आए और विवेकानंद से बोले, अगर ऐसी छोटी-मोटी बाधाओं को देखकर रुक जाओगे तो दुनिया में कैसे चलोगे? तुम तो बड़े आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक माने जाते हो। जरा-सी नदी नहीं पार कर सकते? देखो, नदी ऐसे पार की जाती है। 



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महात्माजी खड़े हुए और पानी की सतह पर चलते हुए लंबा चक्कर लगाकर वापस स्वामीजी के पास आ खड़े हुए। स्वामीजी ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा- महात्माजी, यह सिद्धि आपने कहां और कैसे पाई? 



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महात्माजी मुस्कुराए और बड़े गर्व से बोले, यह सिद्धि ऐसे ही नहीं मिल गई। इसके लिए मुझे हिमालय की गुफाओं में तीस साल तपस्या करनी पड़ी। 



महात्मा की बातें सुन स्वामीजी मुस्कराकर बोले, मैं आश्चर्यचकित तो हूं लेकिन नदी पार करने जैसे काम जो दो पैसे में हो सकता है, उसके लिए आपने जिंदगी के तीस साल बर्बाद कर दिए। यानी दो पैसे के काम के लिए तीस साल की बलि! ये तीस साल अगर आप मानव कल्याण के किसी कार्य में तो आपका जीवन सचमुच सार्थक हो जाता। महात्मा उन्हें अपलक देखते रह गए।



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