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जानिए, हिंदू नवसंवत्सर की गणना किस प्रकार है अंग्रेजी कैलेंडर पद्धति से ज्यादा बेहतर

Patrika news network Posted: 2017-03-28 12:32:55 IST Updated: 2017-03-28 12:32:55 IST
जानिए, हिंदू नवसंवत्सर की गणना किस प्रकार है अंग्रेजी कैलेंडर पद्धति से ज्यादा बेहतर
  • भारतीय नववर्ष उस समय मनाया जाता है, जब प्रकृति में नई कोपलें व नए पत्ते आ रहे होते हैं, इस प्रकार हमारा नववर्ष प्रकृति सम्मत भी है, जबकि एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष तब मनाया जाता है, जब प्रकृति में पत्ते झड़ तो रहे होते हैं, नए नहीं उग रहे होते।

जयपुर

युवा आज पूरी तरह माडर्न हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि वह अपनी परंपराओं से टूट गया है। कोई भी त्योहार हो, युवा पूरी तरह उसमें रम रहा है। हालांकि नए जमाने के अनुसार इन पर्वों का तरीका बदल गया है। एक नजर युवाओं की ओर से पर्व मनाए जाने वाले तरीकों पर-



इंटरनेट से पूजा 

आज का युवा भले परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना नहीं करता हो, लेकिन ढेरों ऐसी वेबसाइट्स हैं, जिनके माध्यम से वे धर्म और परंपराओं से जुड़ा रहता है। सुबह उठकर पूजा भले न करे, किंतु काम पर ट्रेन आदि में जाता है, तो हेडफोन के साथ धार्मिक संगीत सुनते देखा जा सकता है। ज्यादातर युवा मोबाइल की होम स्क्रीन पर अपने ईष्ट की तस्वीर लगाए दिखते हैं।



मार्केट की भी नजर

धर्म और परंपराओं को फॉलो करने वाले युवाओं पर मार्केट की नजर भी रहती है। हर साल पर्वों और त्योहारों पर बड़े-बड़े होटल स्पेशल मीनू प्लान करते हैं। नवरात्र पर विशेष थालियां और व्रत से जुड़ा भोजन ऑफर किया जाता है। 



विश्व नववर्ष के रूप में मनाना चाहिए हिंदू नव संवत्सर 

पाश्चात्य नया साल का कोई भी आध्यात्मिक पहलू नहीं है, वह केवल भौतिकतावादी सोच को प्रकट करता है, जबकि विक्रम संवत नववर्ष पूर्णत: आध्यात्मिक पवित्रता व आनंद की अनुभूति लिए ऐसी तिथि है, जो शास्त्रों में मान्य है। माना जाता है की ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना इसी तिथि को की थी। इसलिए यह नव वर्ष पूरे विश्व का माना जाता है। इसलिए इसे विश्व नववर्ष के रूप में ही प्रचारित-प्रसारित करना चाहिए।     



भारतीय नववर्ष उस समय मनाया जाता है, जब प्रकृति में नई कोपलें व नए पत्ते आ रहे होते हैं, इस प्रकार हमारा नववर्ष प्रकृति सम्मत भी है, जबकि एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष तब मनाया जाता है, जब प्रकृति में पत्ते झड़ तो रहे होते हैं, नए नहीं उग रहे होते। 



पाश्चात्य नववर्ष उस समय मनाया जाता है जब सूर्य असुर दिशा दक्षिणायन होता है। भारतीय नव वर्ष उस समय मनाया जाता है जब सूर्य दक्षिण से ठीक पूर्व में आ गया होता है, जो नव ग्रहों के शुभ प्रभाव भी प्रदान करता है इसलिए चैत्र नवरात्र नव ग्रहों के शुभ प्रभावों को जागृत करवाने वाले माने जाते हैं। 



चूंकि ग्रैगेरियन कैलेंडर में नववर्ष की शुरुआत मध्य रात्रि में होता है, इसलिए वह अंधकारी व आसुरी कहलाता है। जबकि हमारा नववर्ष नव ऊषा की किरण के साथ प्रारंभ होता है।




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