Ad Block is Banned Click here to refresh the page

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे

शिवयोग: प्राचीन ऋषियों की इस विद्या को साइंस ने भी किया स्वीकार, अवधूत बाबा को मिली मानद डिग्री

Patrika news network Posted: 2017-04-10 16:28:47 IST Updated: 2017-04-10 16:31:39 IST
  • कॉस्मिक मेडिसिन का लक्ष्य भी मानव जीवन को सुखी और स्वस्थ बनाना है। यही कारण है कि आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पारंगत डॉक्टर शिवयोग का रहस्य जानना चाहते हैं ताकि वे मानव शरीर की बेहतर ढंग से सेवा कर सकें।

गुरुग्राम

भारतीय संस्कृति में योग शब्द का अनेक बार उल्लेख किया गया है। अगर सामान्य अर्थ में लिया जाए तो योग का मतलब है- जोड़ना, परंतु योग सिर्फ जोड़ने भर की प्रक्रिया का नाम नहीं है। यह बहुत गहन शब्द है। 



हमारे देश में विभिन्न विचारकों, दार्शनिकों और ऋषियों ने योग को अनेक रूपों में परिभाषित किया है। इन्हीं दार्शनिकों में जाना-पहचाना नाम हैं- अवधूत बाबा शिवानंद। वे मुख्य रूप से शिवयोग के लिए जाने जाते हैं। 


हाल में उन्हें डॉक्टर डीवाई पाटिल मेडिकल यूनिवर्सिटी ने मानद डिग्री से सम्मानित किया है। इस अवसर पर अवधूत बाबा शिवानंद ने बताया कि शिवयोग हमारे प्राचीन ऋषियों की विद्या है। भौतिक शरीर हमारे अस्तित्व का सिर्फ एक पहलू है। इसके अलावा भी हमारे अस्तित्व से जुड़े अनेक पक्ष हैं जिन्हें पहचानकर मानव रोगमुक्त तथा सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। 



जिस प्रकार पश्चिम ने दुनिया को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दिया, जिसका लक्ष्य मानव शरीर को स्वस्थ बनाना है। उसी प्रकार कॉस्मिक मेडिसिन का लक्ष्य भी मानव जीवन को सुखी और स्वस्थ बनाना है। यही कारण है कि आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पारंगत डॉक्टर शिवयोग का रहस्य जानना चाहते हैं ताकि वे मानव शरीर की बेहतर ढंग से सेवा कर सकें।


उन्होंने बताया कि रोग का एक और बड़ा कारण रसायन युक्त खेती है। शिवयोग कॉस्मिक एग्रीकल्चर के जरिए धरती और अन्न में घुल रहे विष को रोका जा सकता है। यही नहीं, खर्च में बिना किसी वृद्धि के पैदावार दो से आठ गुणा तक बढ़ाई जा सकती है। 


इस अवसर पर उन्होंने मानव जीवन के विविध आयामों की चर्चा करते हुए सुख, शांति और स्वस्थ जीवन के रहस्य बताए। 




rajasthanpatrika.com

Bollywood