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मिलिए देश के 'संभावित' राष्ट्रपति से, जानें इंटरनेट पर अचानक से किस बात के लिए कर रहे ट्रेंड

Patrika news network Posted: 2017-06-19 15:53:25 IST Updated: 2017-06-19 15:54:01 IST
मिलिए देश के 'संभावित' राष्ट्रपति से, जानें इंटरनेट पर अचानक से किस बात के लिए कर रहे ट्रेंड
  • भाजपा ने जो कार्ड खेला था, उसमें फिलहाल विरोधी चित नजर आ रहे हैं। इस कार्ड का जवाब विरोधी दल किस तरह से देते है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।

लखनऊ।

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीए के उम्मीवार का नाम घोषित कर दिया है। शाह ने भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार घोषित किया। अमित शाह ने कहा कि कोविंद हमेशा से ही पिछड़े आैर दलित वर्गों से संघर्ष करते रहे हैं। 


इधर कोविंद का नाम घोषित होते ही सोशल मीडिया पर भी यह खबर चर्चा का विषय बन गई।  देखते ही देखते ये खबर ट्रॉल करने लग गई।  वहीं ज़्यादातर लोग संभावित राष्ट्रपति की जाति जानने के उत्सुक दिखाई दिए। सर्च इंजन्स में कोविंद के जाति जानने की उत्सुकता यूज़र्स में नज़र आई।  


दरअसल, भाजपा ने जो कार्ड खेला था, उसमें फिलहाल विरोधी चित नजर आ रहे हैं। इस कार्ड का जवाब विरोधी दल किस तरह से देते है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। राम नाथ कोविंद फ़िलहाल बिहार के राज्यपाल हैं। वे भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।


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मायावती को झटका! 

उधर, उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के रहने वाले रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित कर भाजपा-एनडीए ने दलित वोटों को साधने की कोशिश की है। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों भीम आर्मी बनाम सवर्णों के बीच शुरू हुए संघर्ष, गुजरात में दलितों के उत्पीड़न और बिहार-झारखण्ड-मध्य प्रदेश में कोविंद के सजातीय व अन्य दलित वोटरों को अपनी ओर लुभाने की कोशिश के तहत भाजपा ने बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेला है। 


दलित-ओबीसी वोटबैंक के दम पर घेराबंदी की तैयारी कर रहे विपक्ष को फिलहाल भाजपा ने बड़ी टेंशन दी है।


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कोविंद का नाम आगे कर भाजपा ने सबसे बड़ी चुनौती बसपा सुप्रीमो मायावती को दी है। उत्तर प्रदेश में चुनावी हार के बाद अपने अस्तित्व को मजबूत करने में जुटी मायावती गुजरात, बिहार, झारखण्ड और मध्य प्रदेश के दलित वोटरों को भी लुभाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। 


उनके इस अभियान के बीच अब राष्ट्रपति चुनाव पर उनकी और उनकी पार्टी के रुख का सभी को इंतजार रहेगा। इसके साथ ही भाजपा विरोधी दलों के लिए राम नाथ कोविंद के नाम का विरोध करना इस कारण मुश्किल होगा क्योकि भाजपा इस विरोध को दलित विरोध करार देने की कोशिश करेगी।

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