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फोटो-कंटेंट: राकेश शर्मा "राजदीप" 


उदयपुर  अमूमन हम सेब, चीकू, संतरा, तरबूज, पपीता, आम, बेर आदि खाकर बीज-गुठलियां कचरे में फेंक देते हैं। हमें माचिस की जली तीलियां, अगरबत्ती और कुल्फी की डंडियां, मिर्ची के डंठल, सूखे पेड़-पौधों की टहनियां और जड़ें, बबूल के कांटे, हरे तथा सूखे नारियल के खोल अनुपयोगी लगते हैं। लेकिन शहर में एक शख्स ऐसे भी हैं जो करीब 28 साल से इन्हीं अनुपयोगी मानी जाने वाली वस्तुओं से अपने हाथों के हुनर का एेसा जादू जगाए हुए हैं जो देखते ही बनता है।



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