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भोपाल. ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में अनेक उपाय बताए गए हैं। उन्हीं में से एक है भेंट या प्रसाद। जब ईश्वर ही हर वस्तु और पदार्थ का निर्माता है तो उसे ये सब अर्पित करने की आवश्यकता क्या है? वास्तव में प्रसाद या भेंट एक सूक्ष्म त्याग है जो अपने भंडार से कोई भक्त भगवान को भेंट करता है। उसमें महत्वपूर्ण यह नहीं कि वह कितना है, बल्कि महत्व इस बात का है कि उसे किस भाव के साथ अर्पित किया गया है। 



आगे पढ़िए एक ऐसे मंदिर की कथा जहां देवी को चढ़ाए जाते हैं सैंडल




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