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जयपुर. दुनिया के सभी धर्म ग्रंथों ने रिश्तों में मां का दर्जा सबसे ऊंचा माना है। संतान की पहली गुरु मां होती है। वही उसे पालती है। उसकी गोद में बच्चा जो भाषा सीखता है उसे मातृभाषा कहा जाता है। हमारी सनातन संस्कृति में गौरीशंकर, सीताराम, राधेश्याम जैसे नाम रखने की परंपरा भी यह साबित करती है कि मां का स्थान दुनिया के और दस्तूरों से बड़ा और सबसे पहले है। 



ऋषियों, दार्शनिकों ने ग्रंथों में ऐसी कई बातों का उल्लेख किया है जिनका ध्यान गर्भवती महिला को रखना चाहिए, क्योंकि उसका उल्लंघन न सिर्फ बच्चे के लिए, बल्कि उसके लिए भी हानिकारक हो सकता है। पढ़िए ऐसी ही कुछ बातें-



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